शनिवार, 10 सितंबर 2011

मग-भोजक संगठनों की अंदरूनी हालात Post1

मग-भोजक लोगों के अनेक संगठन बनते बिगड़ते रहे हैं। इन संगठनों की अंदरूनी हालात चाहे जो भी हो उनके द्वारा व्यक्त विचारों से भी बहुत कुछ जाना जा सकता है। मैं ने उनसे पूछ कर उनके द्वारा प्रकाशित सामग्री बिना अपनी टिप्पणी के स्कैंड रूप में डालने का सिलसिला इस बार से शुरू किया है। एकाध पृष्ठ मुखपृष्ठ पर और शेष इसी ब्लाग के ‘‘संगठन एवं राजनीति’’ नामक स्वतंत्र पृष्ठ पर क्लिक कर और स्कैंड पृष्ठ पर डबल क्लिक कर पढ़ें


एकाध पृष्ठ मुखपृष्ठ पर और शेष इसी ब्लाग के ‘‘संगठन एवं राजनीति’’ नामक स्वतंत्र पृष्ठ पर क्लिक कर और साइज बड़ा करने के लिये स्कैंड पृष्ठ पर डबल क्लिक कर पढ़ें

गुरुवार, 8 सितंबर 2011

गया जी श्राद्ध में मग ब्राह्मणों की भूमिका

सामान्यतः
मग ब्राह्मण पूरे भारत में विभिन्न मंदिरों में पुजारी का काम करते हैं। सूर्य मंदिर का पुजारी, भोग लगाने वाला भोजक कहा जानेवाला धीरे-धीरे वैदिक एवं जैन दोनों मंदिरों का पुजारी बनता चला गया। अन्य ब्राह्मण विभिन्न मंदिरों के पुजारी होने पर मग ब्राह्मणों का उतना विरोध कर नहीं पाते क्यांेकि मंदिर बनाने वाले राजा या सेठ की ताकत भी उसके पीछे रहती है।
पुरोहिती, यज्ञ में भाग लेना और श्राद्ध में मग ब्राह्मणों की भूमिका बार-बार झगडे़ का रूप लेती है क्योंकि यह समाज आधारित विकेन्द्रित और व्यापक वर्चस्व का क्षेत्र होता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, उडी़सा के कई किस्से मशहूर हैं। फिर भी आज की तारीख में समाज में लगभग सभी जगह अन्य ब्राह्मणों की तरह मग ब्राह्मणों को स्थान मिलता है।
उत्तर भारतीय ग्रंथों का विशेष उपबंध
श्राद्ध सूर्यास्त के बाद नहीं हो सकता फिर भी अगर बिलंब हो जाय तो क्या करं?
इसका समाधान यह निकाला गया है कि सूर्यवंशी शाकद्वीपी ब्राह्मण को सामने बिठाकर श्राद्ध पूजा करें। बिहार में यह घटना दरभंगा नरेश के यहाँ हुई।

गया श्राद्ध में
गया में प्रवेश के पूर्व पश्चिम एवं उत्तर से आने वाले लोग दो-तीन स्थानांे पर पुनपुन नदी में प्रवेश कर पहला तर्पण आदि कार्य पूरा करते हैं। इन तीनों स्थानों पर मग ब्राह्मण ही पंडा एवं पुरोहित दोनो हैं, चाहे वह स्थान पुनपुन घाट(जम्होर) हो या पुनपुन घाट (पटना जिला) या देवहरा (गोह)।
गया तीर्थ क्षेत्र में भी मातंगवापी क्षेत्र एवं वेदी के पंडे भग ब्राह्मण हैं।
इनके अतिरिक्त अनेक मग ब्राह्मण पंरंपरानुसार गया क्षेत्र मे पिंडदान कराने में आचार्य का काम करते हैं, कुछ स्वतंत्र ढंग से तो कुछ पंडों के कर्मचारी की तरह। इस प्रकार गया श्राद्ध में आज भी इनकी प्रभावी भूमिका है।
गया श्राद्ध के विषय में विस्तृत जानकारी के लिये पढे़ं -
http://gayashraadha.blogspot.com/

रविवार, 21 अगस्त 2011

विभिन्न वेबसाइटों की डायरेक्टरी

श्री राजेश चन्द्र मिश्र , पूर्णिया , बिहार ने विभिन्न वेबसाइटों की डायरेक्टरी बनाई है। यह आप लोगों की सुविधा हेतु पुष्ठ आदानप्रदान पर उपलब्ध कराई गई है।

मग-भोजकों की कई पत्रिकाएं निकलती हैं। इनमें इस बार खाश क्या है? यह बताने का भी प्रयास किया जायेगा। यह सामग्री भी पठनीय पृष्ठ पर मिलेगी । यह पृष्ठ लगातार नई जानकारियों के साथ संपादित होता रहेगा।

सोमवार, 15 अगस्त 2011

पठनीय

मग/भोजक ब्राह्मणों ने अपने बारे में काफी साहित्य प्रकाशित किया है और आज भी वे करते ही हैं, जैसे पुस्तकें, स्मारिकाएं, पत्र-पत्रिकाएं, वेबसाइट, सोसल ग्रूप, वैवाहिकी आदि।
क्या आप जानते हैं कि मगों के बारे में जानने के लिये जितना मग उत्सुक नहीं रहते उससे अधिक अन्य लोग उत्सुक रहते हैं क्योंकि उनकी दृष्टि में मग ब्राह्मण तंत्र परंपरा के वाहक हैं। इस बात में एक हद तक सच्चाई भी है।
कुछ लोग मगों को गैर ब्राह्मण तो कुछ नीच ब्राह्मण साबित करने में लगे रहते हैं। कुछ लोग तटस्थ ऐतिहासिक दृष्टि से भी लिखते हैं। अतः इन सामग्रियों को भी पढ़ना चाहिये। लोगों की सुविधा हेतु मैं ने इस दृष्टि से पठनीय नाम से यह एक स्वतंत्र पृष्ठ बनाया है।
इस पृष्ठ में ऐसी अनेक जानकारियां संक्षिप्त परामर्श के साथ दी जायेंगी जहां परामर्श जरूरी होगा। आपके पास भी यदि कोई ऐसी सूचना हो तो भेजें उसे सम्मिलित किया जायेगा।

जानकारियों का यह सिलसिला निरंतर जारी रहेगा।

शनिवार, 6 अगस्त 2011

प्रिय पाठकगण,

इस ब्लाग का आकार बड़ा होता जा रहा है। कुछ पाठक कई बार इस ब्लाग पर आ चुके होते हैं। उन्हें नई पोस्ट की प्रतीक्षा रहती है। यदि आप चाहते हैं कि आपको नई पोस्ट की सूचना इमेल से दी जाय तो कृपया अपना इमेल टिप्पणियों के माध्यम से भेजें या सदस्य बनें।

गुरुवार, 4 अगस्त 2011

आदान प्रदान पेज पर विस्तार से देखें

श्री राजेश मिश्र एवं राजेन्द्र पाठक, पूर्णिया एवं सुधांश्ुजी रांची ने सामग्री/चित्र भेजे हैं। आपके लिये प्रस्तुत है। इसे संगठन एवं आदान प्रदान पेज पर विस्तार से देखें।

बुधवार, 27 जुलाई 2011

मग एवं भोजक शृंखला 1

श्री सुनील मिश्र ने मांग की है कि मग एवं भोजकों के बारे में स्पष्टीकरण दिया जाय। मैं मगध में रहता हूं मगों के बारे में ही अधिक जानता हूं इसलिये इस बार जैसलमेर के प्रसिद्धवि़ान श्री नंद किशोर शर्मा जी का विस्तृत आलेख उनकी अनुमति से प्रस्तुत कर रहा हूं।

आलेख के पृष्ठों की स्कैंड प्रतियां पोस्टेड हैं।










श्री नंद किशोर शर्मा जी का विस्तृत आलेख